मोहब्बत मे बेवजह





मोहब्बत मे बेवजह; हर बार रुठे, ये भी जायज़ नहीं
हम बस मुस्कुराते रहे, इश्क तो ऐसे भी खिलखिला उठता है।
: संदीप शिवहरे

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