आंखे जब-2 खुले मेरी
आंखे जब-2 खुले मेरी सामने दीदार तेरा हो
दर्पण जो देखूं तो उस पर श्रृंगार तेरा हो।
पाकर तुझे सामने झूम उठे मेरा भी दिल
चांद तारों की ख्वाईशे नहीं रखता बस हर रोज दीदार तेरा हो।।
: संदीप शिवहरे
दर्पण जो देखूं तो उस पर श्रृंगार तेरा हो।
पाकर तुझे सामने झूम उठे मेरा भी दिल
चांद तारों की ख्वाईशे नहीं रखता बस हर रोज दीदार तेरा हो।।
: संदीप शिवहरे
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