वे लोग जो बेफजूल रुपये उडाते है







“वे लोग जो बेफजूल रुपये उडाते है
वो भला गरीबी को क्या जानते है।

जिन्होने गुजारे है दिन ग़ुरबत मे,
वो लोग भूखे पेट सोने का दर्द जानते है।

सीखा है मैने भी उनसे दोस्ती का हुनर
वो कन्धो से कन्धा मिलाकर चलना जानते है।

मुफ़लिसी को बडे करीब से देखा है बहुतो ने
इसलिये वो गर्दिशो मे सम्भलना जानते है।

देखा है छोटे बच्चो को ख्वाईशो मे समझौता करते
वो शायद अब अपने घर के हालात जानते है।“
: संदीप शिवहरे

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