तुझसे मेरा जो नाता है
“तुझसे मेरा
जो नाता है;
वो रूह से रूह
तक जाता है;
बिन बोले जो
समझ जाए;
यह ऐसी सुंदर
एक गाथा है;
सबसे अलग
अनूठा हूं मैं;
पर न जाने
तुझको क्यो भाता हूं;
सच, तुझसे दूर आकर
अब मैं, पछताता हूं;
तुझसे मिलने को
कितने जुगाड़ लगाता हूं;
खट्टी मीठी सी हैं
कुछ, हमारी दोस्ती
जिसमें तु इमली, और
मैं आम सरीखा हूं;
जब तक तुझसे
जी-भर लड़ न लूं
किंचित भी चैन
मुझे नहीं आता हैं;
बिन बोले जो
समझ जाए;
यह ऐसी सुंदर
एक गाथा है;
तुझसे मेरा
जो नाता है;
वो रूह से रूह
तक जाता है।“
: संदीप शिवहरे
समझ जाए;
यह ऐसी सुंदर
एक गाथा है;
सबसे अलग
अनूठा हूं मैं;
पर न जाने
तुझको क्यो भाता हूं;
सच, तुझसे दूर आकर
अब मैं, पछताता हूं;
तुझसे मिलने को
कितने जुगाड़ लगाता हूं;
खट्टी मीठी सी हैं
कुछ, हमारी दोस्ती
जिसमें तु इमली, और
मैं आम सरीखा हूं;
जब तक तुझसे
जी-भर लड़ न लूं
किंचित भी चैन
मुझे नहीं आता हैं;
बिन बोले जो
समझ जाए;
यह ऐसी सुंदर
एक गाथा है;
तुझसे मेरा
जो नाता है;
वो रूह से रूह
तक जाता है।“
: संदीप शिवहरे

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