“एक रोज़ वो मुझसे अचानक पूछा पड़े
“एक रोज़ वो मुझसे अचानक पूछा पड़े
क्या मैं सच में इतनी सुन्दर हू
जो तुमको इतनी मनभावन हू
फिर क्या था 'संदीप' तो ‘संदीप', बोल पड़ा
हीरे से तो आज तक हीरा भी अंजान है
वरना क्यो रहता वो यूं कोयले के समान हैं।“
: संदीप शिवहरे
क्या मैं सच में इतनी सुन्दर हू
जो तुमको इतनी मनभावन हू
फिर क्या था 'संदीप' तो ‘संदीप', बोल पड़ा
हीरे से तो आज तक हीरा भी अंजान है
वरना क्यो रहता वो यूं कोयले के समान हैं।“
: संदीप शिवहरे
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