फूलों के गुलदस्ते मे कुछ फूल नायाब रखो

"फूलों के गुलदस्ते मे कुछ फूल नायाब रखो
मुरझाए ही सही पर खुशबु खास रखो।

घर से निकलते समय मुस्कुराहट बेहिसाब रखो
जहा तक हो सके बातो मे हिसाब रखो।

बन्द जुबा पर मिठास कुछ खास रखो
जहा दिखे मलाल वहा पहले अपनी बात रखो।

दिलो मे सबके तुम मुकम्मल मकाँ रखो
ज्यादा न सहीं पर थोड़ा सा वक्त अपनो के नाम रखो।

फूलों के गुलदस्ते मे कुछ फूल नायाब रखो
मुरझाए ही सही पर खुशबु खास रखो।"
:संदीप शिवहरे

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