तुम ऊंचे सपने पाले रखो

तुम ऊंचे सपने पाले रखो
बुलंदी को नित्य साधे रखो
होगी एक दिन भोर नयी
तुम स्वयं पर बस, विश्वास रखो।
: संदीप शिवहरे

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