"स्वार्थ"
"स्वार्थ"
स्वार्थ देख चौक गया, क्यो न हूं हैरान
कुदरत से खेल रहा, खुरापाती इंसान।१।
कुदरत से खेल रहा, खुरापाती इंसान।१।
पेड़ काटके कर रहा, सु सड़कों का निर्माण
वायु में घुलते गरल का, न सोचा समाधान।२।
ऊंच-नीच, जाति-पाति में, ही पड़ा इंसान
मजहब में भी देख रहा, फायदा व नुकसान।३।
बूढ़े-बुजुर्गो को भी नहीं छोड़ता, इंसा
अपनों से दूर कर देता, आज का इंसा।४।
: संदीप शिवहरे
वायु में घुलते गरल का, न सोचा समाधान।२।
ऊंच-नीच, जाति-पाति में, ही पड़ा इंसान
मजहब में भी देख रहा, फायदा व नुकसान।३।
बूढ़े-बुजुर्गो को भी नहीं छोड़ता, इंसा
अपनों से दूर कर देता, आज का इंसा।४।
: संदीप शिवहरे
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