उड़ने दो मुझे उन्मुक्त गगन में
"उड़ने दो मुझे उन्मुक्त गगन में
परों को अपने फिर से फैलाने दो
कब तक पिंजड़े में बंद रखोगे
मुझको क्षितिज तक दौड़ लगाने दो।
परों को अपने फिर से फैलाने दो
कब तक पिंजड़े में बंद रखोगे
मुझको क्षितिज तक दौड़ लगाने दो।
रह नहीं सकता में बंदिशों में
मुझको भी आजादी प्यारी है
कही पिंजड़े में रहकर उड़ना भूल न जाऊ
कोशिश करता रहता हूँ फड़फड़ाने की।
ऊपर नील गगन में एक तारा है
जो मुझको भी अति प्यारा है
चाह नहीं मुझे उसे पाने की
पर अभिलाषा है उससे आँख मिलाने की।
उड़ने दो मुझे उन्मुक्त गगन में
परों को अपने फिर से फैलाने दो
कब तक पिंजड़े में बंद रखोगे
मुझको क्षितिज तक दौड़ लगाने दो।"
: संदीप शिवहरे
मुझको भी आजादी प्यारी है
कही पिंजड़े में रहकर उड़ना भूल न जाऊ
कोशिश करता रहता हूँ फड़फड़ाने की।
ऊपर नील गगन में एक तारा है
जो मुझको भी अति प्यारा है
चाह नहीं मुझे उसे पाने की
पर अभिलाषा है उससे आँख मिलाने की।
उड़ने दो मुझे उन्मुक्त गगन में
परों को अपने फिर से फैलाने दो
कब तक पिंजड़े में बंद रखोगे
मुझको क्षितिज तक दौड़ लगाने दो।"
: संदीप शिवहरे

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