जंग लग रही है अब लोहे की दीवारों में



"जंग लग रही है अब लोहे की दीवारों में
टूटने लगी है परत दर परत किनारो में,
अकेला खड़ा रहा, अब तक सबकी ढाल बनकर
बोल रहा आज बेटा, कुछ खास नहीं किया
आपने हमारी मुस्कान बनकर"
: संदीप शिवहरे

Comments

Popular posts from this blog

भींगी आंखों से भारत मां पूंछ रही

लक्ष्मीबाई, एक वीरांगना और उनकी अविस्मरणीय जीवनगाथा।