भींगी आंखों से



“भींगी आंखों से भारत मां पूंछ रही सत्ता के गलियारों से
कि कब तक यूं फेसबुक और ट्विटर में तर्क-वितर्क में समय गवाओगे
देशभक्ति के झूठे नारे और लोगों में झूठी अलख जगाओगे
आखिर कितना और खाओगे और ये बताओ, कहां बचाकर ले जाओगे।

दोषी चाहे जो भी हो- देश के अंदर हो या बाहर हो
आखिर तुम सब कब तक, यूंही मेरे बेटों की शहादत पर शोक मनाओगे
नहीं, ये वक्त नहीं है रोने का, आपस में तर्क-वितर्क और संवाद का
ये वक्त है साथ मिल खड़े होने का, उनकी शहादत का बदला लेने का।

इस बार तुम देना ऐसा जवाब दुश्मन को कि उसकी रूह भी कांप जाए
जिहाद आखिर क्या होता है उसका मतलब वो भली-भांति समझ जाए
और जंग का इतना ही शौक है उन्हे, तो एक बार वीरों को सरहद में ललकारें
हर एक शेर सौ-सौ पर भारी पड़ेगा, वो इतना अच्छे से गांठ बांध लें।

भींगी आंखों से भारत मां पूंछ रही सत्ता के गलियारों से
कि कब तक यूं फेसबुक और ट्विटर में तर्क-वितर्क में समय गवाओगे
देशभक्ति के झूठे नारे और लोगों में झूठी अलख जगाओगे
आखिर कितना और खाओगे और ये बताओ, कहां बचाकर ले जाओगे।।“
: संदीप शिवहरे

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