सपनो कि थी दुनियॉ







"सपनो कि थी दुनियॉ
हकीकत से बेगानी
कंचो की खनक
बचपन कि नादानी
चटपटी कहानी
माँ कि जुबानी
अल्हड रवानी
अपनी मनमानी
न कोई मलाल, साफ था
घाट-2 का पानी
गुजरे दिन
बिसरी बाते पुरानी
सपनो कि थी दुनियॉ
हकीकत से बेगानी।"

: संदीप शिवहरे

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