मत डूबों किसी की निगाहों में

“मत डूबों किसी की निगाहों में, तैर नहीं पाओगे तुम इन राहों में
अक्सर लड़खड़ा जाते हैं पैर, जब-जब परखा गया है प्रेम को धाराओं में।“
: संदीप शिवहरे

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