मैं वो शक्श हू
"मैं वो शक्श हू जो बिन इत्र महकता हू
काल्पनिक नही वास्तविक बाते करता हू।
अक्सर लोग कट जाते है मेरे इस अंदाज से
मैं जवाँ दिल की खूबसूरत बाते करता हू।
काल्पनिक नही वास्तविक बाते करता हू।
अक्सर लोग कट जाते है मेरे इस अंदाज से
मैं जवाँ दिल की खूबसूरत बाते करता हू।
भली-भांती जानता हू कि सादगी है क्या
मैं चेहरे पर शब्दो का श्रृँगार कर निकलता हू।।"
: संदीप शिवहरे
मैं चेहरे पर शब्दो का श्रृँगार कर निकलता हू।।"
: संदीप शिवहरे
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