सोच मन अति व्याकुल है
"सोच मन अति व्याकुल है
कि कल कैसा होये
टुकड़ों में बंट गया
अब किससे दुखड़ा रोये।
खिलखिलाती मुस्कान, कहीं
बन्द है, एक कमरे में
किसने कितना प्यार दिया
सोचती है मन-ही-मन में।
यहां टंगी थी उनकी तस्वीर
अब वो कहां गयी
बंटवारे में क्या,
वो भी दूर चली गयी।
सोच मन अति व्याकुल है
कि कल कैसा होये
टुकड़ों में बंट गया
अब किससे दुखड़ा रोये।।"
: संदीप शिवहरे
कि कल कैसा होये
टुकड़ों में बंट गया
अब किससे दुखड़ा रोये।
खिलखिलाती मुस्कान, कहीं
बन्द है, एक कमरे में
किसने कितना प्यार दिया
सोचती है मन-ही-मन में।
यहां टंगी थी उनकी तस्वीर
अब वो कहां गयी
बंटवारे में क्या,
वो भी दूर चली गयी।
सोच मन अति व्याकुल है
कि कल कैसा होये
टुकड़ों में बंट गया
अब किससे दुखड़ा रोये।।"
: संदीप शिवहरे
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