मसरूफ़ हैं शहर आजकल, आग भड़काने में








“मसरूफ़ हैं शहर आजकल, आग भड़काने में
थोड़ा कुछ मिल जाए, नमक मिर्च लगाने में।
कश्ती जो डूब रही, बचाने कोई नहीं आया
आकर खड़े हो गये पीछे, धक्का लगाने में।
अब इस भीड़ से भी, क्या ही उम्मीद करते
जब अपने ही अड़े खड़े, हमें डूबाने में।“
: संदीप शिवहरे

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