सुना है, तुम

"सुना है, तुम रोज आईने के सामने घण्टों सजते-संवरते थे
सब कहते थे कि तुम बहुत ही खूबसूरत लगा करते थे,
और राज की बात, हम भी पागल थे उन दिनों तुम्हारी एक झलक पाने को
सच, तुम्हें देखने को न जाने कितने घंटे छत पर टहला करते थे।"
: संदीप शिवहरे

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