लोग, मानवता को पैरों तले कुचलने लगे है







“लोग, मानवता को पैरों तले कुचलने लगे है
अपनों को छोड़ रुपए को सर्वस्य मानने लगे है।
जिन चरणों को छूने से, कभी मिलता था परम सुख
आज उन्हीं चरणों को छूने से कतराने लगे है। “
: संदीप शिवहरे

Comments

Popular posts from this blog

भींगी आंखों से भारत मां पूंछ रही

लक्ष्मीबाई, एक वीरांगना और उनकी अविस्मरणीय जीवनगाथा।