मैं-मैं करै कितने जन
“मैं-मैं करै कितने जन, मैं का कोई न अंत
एक मैं धृतराष्ट्र किये, खत्म हुआ कुरु वंश।।
खत्म हुआ कुरु वंश, मैं से टूटा सर्व घमण्ड
धर्मयुद्ध में फिर हुआ, सत्य का परचम बुलंद।।
एक मैं धृतराष्ट्र किये, खत्म हुआ कुरु वंश।।
खत्म हुआ कुरु वंश, मैं से टूटा सर्व घमण्ड
धर्मयुद्ध में फिर हुआ, सत्य का परचम बुलंद।।
कुरुक्षेत्र में हंसा, ठठाके मार-मार 'मैं'
कितने कुरु मर मिटे, शान से करते 'मैं-मैं'।।“
: संदीप शिवहरे
कितने कुरु मर मिटे, शान से करते 'मैं-मैं'।।“
: संदीप शिवहरे
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