लोग मजहब या धर्म को मुल्क और वतन मे बाँटते क्यो हैं
“लोग मजहब या धर्म को मुल्क और वतन मे बाँटते क्यो हैं
और गले मिलने से पहले ही, राजनीति हर जगह लगाते क्यो हैं।
बारूद के ढ़ेर मे बैठकर क्यो बनाना चाहते है मकाँ अमन का
गर मनसूबे है उनके जिहाद के नाम पर लोगो की हत्या करना।
और गले मिलने से पहले ही, राजनीति हर जगह लगाते क्यो हैं।
बारूद के ढ़ेर मे बैठकर क्यो बनाना चाहते है मकाँ अमन का
गर मनसूबे है उनके जिहाद के नाम पर लोगो की हत्या करना।
क्यो कुरान और गीता की आयतों और श्लोको को खड़ा कर देते है कठघरे मे
गर विष ही घोलना है लोगो के ज़हन मे, तो भाईचारे की बातें करते क्यो है।
अक्सर देखा है लोगो को, उतर आते है किसी मासूम के रेप के बाद सडको पर,
मै पूछता हू वारदात के वक्त क्यो बन्द होते है, सारे के सारे दरवाजे उपस्थित लोगो के दिलो के।
लोग मजहब या धर्म को मुल्क और वतन मे बाँटते क्यो हैं
और गले मिलने से पहले ही, राजनीति हर जगह लगाते क्यो हैं।।“
: संदीप शिवहरे
गर विष ही घोलना है लोगो के ज़हन मे, तो भाईचारे की बातें करते क्यो है।
अक्सर देखा है लोगो को, उतर आते है किसी मासूम के रेप के बाद सडको पर,
मै पूछता हू वारदात के वक्त क्यो बन्द होते है, सारे के सारे दरवाजे उपस्थित लोगो के दिलो के।
लोग मजहब या धर्म को मुल्क और वतन मे बाँटते क्यो हैं
और गले मिलने से पहले ही, राजनीति हर जगह लगाते क्यो हैं।।“
: संदीप शिवहरे
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